उपासना सिंह से बाचीत के अंश
मैं 7-8 साल की थी, तब से डांस का बड़ा शौक था। लेकिन नाचती थी तो बेहोश हो जाती थी। फिर जांच के दौरान पता चला कि मेरे दिल में छेद है। डॉक्टर ने बताया कि अगर ऑपरेशन नहीं कराया तो मैं तीन-चार महीने से ज्यादा नहीं जी पाऊंगी। ऑपरेशन पीजीआई, चंड़ीगढ़ में हुआ। कुछ साल तक मेरा चैकअप चलता रहा और ठीक हो गई। उस वक्त घरवाले मेरी हर ख्वाहिश पूरी करते थे। एक बर्थडे पर मां ने मुझे डॉग गिफ्ट किया था। वह कई सालों तक मेरे पास रहा, उसका नाम जैकी था। वह मेरा यादगार बर्थडे था।
मैं जब मुंबई आई थी, तब पहला बर्थडे बड़ी धूमधाम से मनाया था। उस वक्त के कई डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर मेरी बर्थडे पार्टी में आए थे। 4-45 प्रेस के लोग भी शामिल हुए थे। लगता था कि कितनी बड़ी सेलिब्रिटी का बर्थडे है। दरअसल, उस समय मैंने कई फिल्में एक साथ साइन कर ली थीं। आज भी मेरे पास सबके साथ की यादगार फोटोज हैं।
बर्थडे सुनते ही मुझे मां की शक्ल याद आती है। भगवान ने मेरी जिंदगी में सबसे बेहतर इंसान, अच्छी देखभाल करने वाली, अच्छी मार्गदर्शक और सबसे अच्छी दोस्त के रूप में अगर किसी को दिया तो वो मेरी मां हैं। खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे इतनी अच्छी मां मिली। 26 जून को मेरी मां का जन्मदिन आता है और 29 जून को मेरा। मेरे लिए अपने बर्थडे से ज्यादा महत्व मां का जन्मदिन रखता है। वो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मेरे लिए आज भी वो आसपास ही हैं।
कई लोग कहते हैं कि मुझे यह नहीं मिला, वह नहीं मिला। मैं बहुत ज्यादा खुशकिस्मत हूं। भगवान की मुझ पर बहुत कृपा है। मैंने जिस क्षेत्र को प्रोफेशन बनाया, उसे आज भी एन्जॉय कर रही हूं। मुझे शोहरत, दौलत सब मिला। मेरी हर चाहत पूरी हुई। भगवान का शुक्रिया अदा करती हूं और प्रार्थना करती हूं कि मुझे अगले जन्म में भी ऐसी ही जिंदगी मिले।
मैं चंडीगढ़ में थी, लेकिन जन्मदिन मनाने के लिए फ्लाइट पकड़कर मुंबई वापस आ गई। क्योंकि मेरी बहन और उनके दोनों बच्चे मुंबई में हैं। मेरी फैमिली 28 की रात को ही 12 बजे केक काटती है, इसलिए मेरा पहुंचना जरूरी था। बर्थडे करीबी दोस्तों और फैमिली के साथ सेलिब्रेट करती हूं। मैं जब से मुंबई आई, तब से ही होटल बुक करती और अपने सर्कल के लोगों को बुलाकर धूमधाम से बर्थडे मनाती थी। लेकिन दो साल से ऐसा नहीं करती। अब सिर्फ खास लोगों के साथ ही बर्थडे सेलिब्रेट करती हूं। मैं कभी बर्थडे पर शूट नहीं करती हूं।
पहले मुझे शोर-शराबा और धूमधाम से जन्मदिन मनाना अच्छा लगता था। लेकिन फिर मैंने देखा कि अपना बर्थडे खुद ही एंज्वाय नहीं कर पाती थी। मुझे लगता था कि मैं लोगों का ध्यान रखने में व्यस्त रह जाती थी। लोगों को खाना मिला या नहीं? उसने बात की या नहीं? कहीं किसी को किसी बात का बुरा न लग जाए आदि। मुझे लगा कि इन सब के चक्कर में मैं तो अपना बर्थडे सेलिब्रेट ही नहीं कर पाती हूं। इसलिए सिर्फ खास लोगों के साथ सेलिब्रेशन करने लगी, जिनको कुछ न भी पूछ पाऊं तो फर्क नहीं पड़ता। अब अपनों के साथ रहना पसंद करती हूं।
मेरी बहन और उसके बच्चे अपना अलग-अलग गिफ्ट लेकर आते हैं। ठीक रात के 12 बजे डोर वेल बजाते हैं और जब देखती हूं तो केक और ढेर सारे गिफ्ट सजाकर रखे हुए होते हैं। मेरा बर्थडे हमेशा खूबसूरत रहा है। दो साल पहले मेरी बहन की बेटी ने जोड़-जोड़कर इकट्ठे किए हुए सारे पैसे खर्च कर मेरे लिए तोहफे में मोबाइल लेकर आई। यह मेरे लिए सबसे अच्छा गिफ्ट है।
जब वह 7-8 साल की थी, तब मेरे बर्थडे पर उसने कविता लिखी थी। जिसका आशय था कि मेरे लिए मां और मासी में कोई खास फर्क नहीं है, क्योंकि मासी भी मुझे मां जैसा प्यार करती है। वह इतनी खूबसूरत कविता थी कि पढ़कर मेरी आंखों में आंसू आ गए थे।
अभी पंजाबी फिल्में कर रही हूं। कुछ पंजाबी फिल्में नौकर वटीदा, किटी पार्टी, तेरियां मेरियां हेराफेरियां, अरब मोटियारा रिलीज के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रेमो डिसूजा की बॉलीवुड फिल्म एबीसीडी 3 की शूटिंग कर चुकी हूं। एक फिल्म डायरेक्ट भी करूंगी।